शिवसेना उत्तर भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री दीपक कम्बोज, आई टी सैल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अजय बब्बर तथा राष्ट्रीय प्रभारी श्री सोनू थापर की ओर से केंद्र सरकार के समक्ष एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा उठाया गया है।
पंजाब ने 1980–90 के दशक के दौरान उग्रवाद का एक काला दौर देखा, जिसमें हजारों निर्दोष लोगों की जान गई और लाखों परिवार बुरी तरह प्रभावित हुए। इस दौर में खासतौर पर आम नागरिकों, व्यापारियों, मजदूरों और हिन्दू समाज के लोगों को निशाना बनाया गया। सरकारी आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि उस समय हजारों निर्दोष नागरिक आतंकवाद का शिकार बने।
आज इतने वर्षों बाद भी उन पीड़ित परिवारों को न तो पूरा न्याय मिल पाया है और न ही उन्हें उनका उचित मुआवजा दिया गया है। यह एक गंभीर सामाजिक और मानवीय मुद्दा है, जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
शिवसेना उत्तर भारत यह मांग करती है कि:
👉 लगभग 35,000 आतंकवाद पीड़ित परिवारों को न्याय दिया जाए
👉 781 करोड़ रुपये के लंबित मुआवजा पैकेज को तुरंत जारी किया जाए
यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि वर्षों बीत जाने के बावजूद पीड़ित परिवार आज भी अपने अधिकारों के लिए दर-दर भटक रहे हैं। यह केवल आर्थिक सहायता का विषय नहीं, बल्कि उनके सम्मान, न्याय और आत्मसम्मान से जुड़ा मुद्दा है।
शिवसेना उत्तर भारत केंद्र सरकार से सीधे सवाल पूछती है:
❗ आखिर कब मिलेगा इन पीड़ित परिवारों को न्याय?
❗ क्यों अब तक 781 करोड़ रुपये का पैकेज जारी नहीं किया गया?
❗ क्या पंजाब के हिन्दू पीड़ितों के साथ भेदभाव किया जा रहा है?
हम केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग करते हैं:
➡️ 781 करोड़ रुपये का मुआवजा पैकेज कब जारी होगा?
➡️ पीड़ित परिवारों को उनका हक कब मिलेगा?
➡️ इस मुद्दे पर सरकार की स्पष्ट नीति क्या है?
शिवसेना उत्तर भारत यह स्पष्ट करना चाहती है कि यदि इस गंभीर मुद्दे पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन देशभर में लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने को मजबूर होगा।
यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानवता और न्याय का प्रश्न है।
अब समय आ गया है कि सरकार इन पीड़ित परिवारों के दर्द को समझे और उन्हें उनका हक दिलाए।

