National Dairy Development Board की जालंधर स्थित यूनिट एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। जानकारी के अनुसार, वेरेका मिल्क प्लांट के पीछे स्थित NDDB कार्यालय में तैनात मौजूदा प्रिंसिपल पर सरकारी पेड़ों की लकड़ी को कथित रूप से कटवाकर बेचने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कार्यालय परिसर में लंबे समय से कई पुराने पेड़ और उनकी लकड़ियां पड़ी हुई थीं। आरोप है कि इन लकड़ियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में कटवाकर कई टन के हिसाब से बेच दिया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह लकड़ी सरकारी संपत्ति थी और इसे बेचकर निजी लाभ उठाने की कोशिश की गई है।
बताया जा रहा है कि कार्यालय के पास ही पुराने पेड़ों की लकड़ी काफी समय से पड़ी हुई थी, जबकि परिसर में बने कुछ क्वार्टरों के आसपास लगे पेड़ों को भी कथित रूप से काटकर बेच दिया गया। इस पूरे मामले की तस्वीरें भी संबंधित अधिकारियों को भेजी गई हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह मामला सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और संभावित धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि पेड़ों की लकड़ी को बेचकर निजी फायदा उठाया गया, जिससे संस्था को आर्थिक नुकसान पहुंचा है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी संबंधित प्रिंसिपल के खिलाफ कर्मचारियों से सुरक्षा गार्ड के बजाय सफाई और अन्य कार्य करवाने के आरोप सामने आए थे, जिसकी शिकायत भी उच्च अधिकारियों को भेजी जा चुकी है।
अब इस नए मामले को लेकर भी अधिकारियों को विस्तृत शिकायत भेजी गई है और मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाई जाए। साथ ही, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
इस मामले के सामने आने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि NDDB के उच्च अधिकारी इस गंभीर आरोप पर क्या कार्रवाई करते हैं और क्या संस्था की संपत्ति के कथित दुरुपयोग की निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी।
